नेपाल: PM केपी शर्मा ओली के कहने पर संसद भंग, पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ के खेमे ने किया अनुशासनात्मक कार्रवाई का फैसला

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नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के पुष्पकमल दहल खेमे ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का फैसला किया है। पीएम ओली के कहने पर देश की संसद को भंग कर दिया गया है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सिफारिश पर राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने देश की संसद को भंग कर दिया और मध्यावधि चुनावों की तारीख का ऐलान भी कर दिया। इस फैसले को नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) में ओली के विरोधियों और विपक्षी नेपाली कांग्रेस (NC), दोनों ने ‘असंवैधानिक और तानाशाही’ बताया है। यहां तक कि उनके कैबिनेट के सात मंत्रियों ने विरोध में इस्तीफा दे दिया है। नेपाल में फिर मचा सियासी बवाल, ओली ने उठाया बड़ा कदम ओली के खिलाफ कार्रवाई का फैसला नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के प्रवक्ता नारायणकाजी श्रेष्ठ ने ओली के कदम को अलोकतांत्रिक, संविधान-विरोधी और तानाशाही बताया है। पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में ओली के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इसके लिए केंद्रीय समिति में सोमवार को होने वाली बैठक में प्रस्ताव दिया जाएगा। वहीं, दहल के प्रेस अडवाइजर बिश्नु सपकोटा ने कहा है, ‘नेताओं ने पीएम ओली के फैसले से हुई परेशानियों के बारे में सलाह की है। नेपाल में अप्रैल-मई में होंगे मध्यावधि चुनाव, संसद भंग करने के बाद* राष्ट्रपति का ऐलान
विरोध में उतरा विपक्ष, ओली को बताया ‘तानाशाह’
नेपाल कांग्रेस ने कहा है कि संसद को भंग करने की ओली की सलाह संविधान की आत्मा और प्रावधानों के खिलाफ है और पार्टी इस कदम का मजबूती से विरोध करेगी। पार्टी के प्रवक्ता बिश्व प्रकाश शर्मा ने कहा है, ‘हम इसे तानाशाह बनने की ओली ख्वाहिश की ओर आखिरी कोशिश मान रहे हैं।’ पार्टी का कहना है कि पार्टी की आंतरिक कलह की वजह से कोरोना वायरस की महामारी के बीच देश को अस्थिरता की ओर धकेलना निंदनीय फैसला है। ओली बनाम प्रचंड का असर? पीएम ओली का कम्युनिस्ट पार्टी के चेयरमैन पुष्प कमल दहल प्रचंड के साथ कई मुद्दों पर विवाद था। दोनों नेताओं के बीच पार्टी की पहल पर पहले एक बार समझौता भी हुआ था। लेकिन, बाद में मंत्रिमंडल के बंटवारे को लेकर फिर से खींचतान शुरू हो गई थी। ओली ने अक्टूबर में बिना प्रचंड की सहमति के अपनी कैबिनेट में फेरबदल किया था।

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