मदरसा शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़े का शक, गोरखपुर और बस्ती मंडल के शिक्षकों का होगा सत्यापन

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उत्तर प्रदेश में फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों पर शिक्षक की नौकरी करने मामला सामने आने के बाद अब शासन ने मदरसा शिक्षकों के सर्टिफिकेट के जांच के आदेश दिए हैं। गोरखपुर बस्ती मंडल में कुल 1740 मदरसा शिक्षक के दस्तावेज़ों की जांच के लिए जिलेवार अलग-अलग टीम गठित की गई है। उत्तर प्रदेश में इन दिनों फ़र्ज़ी शिक्षक का मुद्दा गर्म है खासकर यह मामला तब तूल पकड़ा जब फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के आधार पर कई जगह नौकरी करने वाली अनामिका शुक्ला प्रकरण का खुलासा हुआ। प्रदेश के ऐसे कई जिले है जहां फ़र्ज़ी सर्टिफिकेट्स पर शिक्षक विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। इन सब के बीच अब प्रशासन ने मदरसा में कार्यरत शिक्षकों के सर्टिफिकेट्स को जांच करने के आदेश दे दिए है। इसके लिए जिलेवार अलग अलग टीम भी गठित की गई है। वहीं जिला अल्पसंख्यक विभाग को समस्त जानकारी मदरसा शिक्षा परिषद को भेजनी है। पूरी प्रक्रिया एक माह भीतर ही पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है। गोरखपुर व बस्ती मंडल में कार्यरत 1740 मदरसा शिक्षकों के दस्तावेजों के सत्यापन के लिए समय सीमा व जांच अधिकारी तय कर दिए गए हैं। तीन दिन के भीतर समस्त अनुदानित मदरसों को जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में निर्धारित प्रारूप में शिक्षकों की समस्त जानकारी व उनके दस्तावेज़ों की स्वप्रमाणित प्रतियां जमा करानी है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग समस्त जानकारी मदरसा शिक्षा परिषद को भेजेगा। पूरी प्रक्रिया एक माह भीतर ही पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है। जांच के लिए अलग-अलग टीमें गठित गोरखपुर मंडल में 10 अनुदानित मदरसों में 138 शिक्षक व कुशीनगर के 25 मदरसों में कार्यरत 377 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कानपुर की मंडलीय अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रियंका अवस्थी को सौंपी गई है। महराजगंज के 21 मदरसों के 310 शिक्षकों के दस्तावेज़ों की जांच गोंडा के जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी पवन कुमार सिंह व देवरिया के 17 मदरसों के 285 शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कुशीनगर के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी देवेंद्र राम करेंगे। बस्ती मंडल के 43 मदरसों के 730 शिक्षकों के दस्तावेज़ों की जांच गोरखपुर के मंडलीय अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष पाण्डेय करेंगे। सत्यापन प्रभारियों के साथ उनके सहयोग के लिए एक एक कर्मचारी भी लगाए गए है। सत्यापन रिपोर्ट का निदेशालय स्तर पर संयुक्त निदेशक एसएन पांडेय द्वारा रैंडम परीक्षण किया जाएगा। दस्तावेज सत्यापन की पूरी प्रक्रिया एक माह के भीतर पूर्ण करने के आदेश हैं।

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