पद का दुरूप्रयोग करने वालों से प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं अन्याय के विरूद्ध संघर्ष ही मेरी पहचान जिले में किसी की हैसियत नहीं जो मेरे कार्यो पर उँगली उठा सके हांथी अपनी चाल में चलता है, कुत्ते भौंका करते हैं रायबरेली, 26 नवम्बर, 2020! सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पूर्व डीजीसी (फौ0) ओ.पी. यादव ने अपने विरूद्ध समाचार-पत्रों में प्रकाशित निन्दा प्रस्ताव व नोटिस भेजने के समाचार-पत्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को कुर्सी तो मिल गयी, लेकिन बैठने का सलीका नहीं आया। पदाधिकारी सेवाभाव भूल अधिवक्ता कल्याण योजनाओं को दर किनार कर स्वार्थ सिद्ध में लग गये हैं। अवैध ढंग से जमीनों पर कब्जा करने के लिये अधिकारियों पर पद का दुरूप्रयोग किया जा रहा है। दुकानदारों से मिलीभगत कर दीवानी न्यायालय की बाउन्ड्री से दुकानों के मध्य की तीन फिट की जगह पर दुकानें बनवा दी गयीं, जिससे मान्नीय न्यायालय की सुरक्षा को अत्यधिक खतरा उत्पन्न हो गया।* पद पर कार्यकाल से अधिक दिनों तक बने रहने के लिए शपथ में देरी का नाटक किया गया, यह पहला मौका था जब अधिवक्ताओं के चैम्बर की कुर्सी मेजें बिना नोटिस के तोड़कर फेंक दी गयीं। अधिवक्ताओं ने जिन्हें अपना पदाधिकारी चुना था वे मूकदर्शक बने रहे, अंततः उनकी बुजदिली के कारण अधिवक्ताओं को पीछे हटना पड़ा। अपने पद का दुरूप्रयोग करने वालों से हमें प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है। अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना ही हमारी पहचान है। जिले में किसी की हैसियत नहीं जो मेरे कार्यो पर उँगली उठ सके। निन्दा प्रस्ताव की बात करने वालों के बारे में इतना ही कहना चाहूँगा कि हांथी अपनी चाल से चलता है, कुत्ते भूंका करते हैं। साधारण चोटों के आधार पर लिखे गये 307 आई.पी.सी. के मुकदमें से 307 की धारा हटवाने के प्रयास का जिस सतहे ढंग से प्रचारित किया गया वह कार्य अवश्य निन्दनीय है। कार्य को एैतिहासिक बताने वालों को इतिहास की जानकारी नहीं है, यही नर्वदा प्रसाद सोनकर के विरूद्ध 307 आई.पी.सी. का मुकदमा थाना डलमऊ में लिखा गया था। मेरे अध्यक्षीयकाल में खड़े-खड़े जमानत हुई थी, लेकिन इसका प्रचार कभी नहीं किया गया, कहावत है कि हल्का तवा जल्द गर्म होता है, लेकिन उतनी ही तेजी से ठंडा भी होता है। ‘सदा सीने में खंजर लटकते रहे, हम जहाँ भी रहे हैं, खटकते रहे।’

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